SCERT Quality Education 2026 : गुणवत्ता समेत पांच मानकों पर परखे जाएंगे विद्यालय, मूल्यांकन करेगा SQAAF, एनईपी के तहत एससीईआरटी ने शुरू की प्रक्रिया

SCERT Quality Education 2026 : गुणवत्ता समेत पांच मानकों पर परखे जाएंगे विद्यालय, मूल्यांकन करेगा SQAAF, एनईपी के तहत एससीईआरटी ने शुरू की प्रक्रिया

लखनऊ। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत परिषदीय विद्यालयों में पठन-पाठन में कई बदलाव किए जा रहे हैं। स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन व उनके कामकाज जैसे पांच मानकों के आधार पर एक्रीडिटेशन (ग्रेडिंग) करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) स्कूल क्वालिटी एसेसमेंट एंड एक्रीडिटेशन फ्रेमवर्क (स्क्वाफ) का विकास कर रहा है।



एनईपी के तहत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर प्रदेश में स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड अथॉरिटी (एसएसएसए) की स्थापना की जा रही है। इसका कार्य स्कूलों का गुणवत्तापूर्ण एक्रीडिटेशन सुनिश्चित करना है। इसी क्रम में एससीईआरटी ने भी एसएसएसए की स्थापना की है। अब एसएसएसए के तहत स्क्वाफ का विकास किया जा रहा है। यह स्कूलों के आकलन का व्यापक ढांचा होगा। इससे शैक्षणिक चुनौतियों की पहचान कर सुधार किया जाएगा।

एससीईआरटी के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान ने बताया कि एसएसएसए की स्थापना एससीईआरटी में की गई है। यह स्कूलों को वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप बनाएगा। इस व्यवस्था को जल्द ही प्रभावी बनाया जाएगा।


ग्रेडिंग के आधार पर सुधारी जाएंगी व्यवस्थाएं

डॉ. सचान ने बताया कि स्क्वाफ के तहत विद्यालयों का ढांचागत विकास, शिक्षक-कर्मचारियों की स्थिति, पढ़ाई की गुणवत्ता, आवश्यक संसाधन समेत पांच पैरामीटर होंगे। इससें सब पैरामीटर में क्लास रूम, बच्चों की प्रवेश स्थिति, स्मार्ट क्लास, शौचालय, मिड-डे मील यूनिट, निपुण मूल्यांकन आदि के आधार पर स्कूलों की ग्रेडिंग की जाएगी। इसके आधार पर स्कूलों की व्यवस्था में आवश्यक सुधार किया जाएगा।

यूपी स्क्वाफ को लागू करने वाला पहला प्रदेश हो सकता है। यह व्यवस्था अभी किसी प्रदेश में लागू नहीं है। प्रदेश में इसे नए सत्र 2026-27 से पहले प्रभावी बनाने की तैयारी है।

एनईपी के ही तहत इस साल से स्कूलों में बच्चों के लिए बैगलेस डे की व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत महीने के आखिरी शनिवार को बच्चे बिना बैग के स्कूल आएंगे। इस दिन उन्हें गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाई व खेलकूद के जरिये व्यावहारिक ज्ञान दिया जाएगा। इस सत्र में इसे दस दिन के लिए लागू किया गया है।
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