🌹संक्षिप्त जीवन परिचय 🌹
*डा0 रामाशीष सिंह*
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✍श्रवण कुमार कुशवाहा
======================== *जाड़े का महीना, घनघोर कोहरा ,कडकडाती ठण्ड के बीच एक किसान परिवार में गांव पिपरिया करनजहाँ, जनपद महाराजगंज में श्री रामकिशुन सिंह के घर एक बालक का जन्म दिनांक 07 जनवरी 1977 के दिन हुआ घर में खुशियां मनाई गई क्योंकि घर में पहली सन्तान के रूप में पुत्र का जन्म हुआ था,नवजात बालक का नाम रखा गया रामाशीष |

चार भाई बहनों में सबसे बड़े थे बालक राम आशीष की प्रारंभिक शिक्षा गांव के प्राथमिक पाठशाला में हुआ, नवजात बालक रामाशीष बालपन से ही होनहार थे ,सामूहिक कार्य में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते थे, उन्होंने हाईस्कूल व इंटर की पढ़ाई घुघली महाराजगंज स्थित डी0ए0वी0 इंटर कालेज से पूर्ण की |
चार भाई बहनों में बड़े होने के कारण घर की जिम्मेदारियां भी बखूबी निभाने के साथ साथ आगे की पढ़ाई के लिए जेएनयू पीजी कॉलेज महाराजगंज में दाखिला लिया अच्छे अंको से ग्रेजुएशन पूर्ण करने के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में दाखिला लिया और वहां से अंग्रेजी साहित्य से शोध का कार्य पूर्ण किया |
उनकी नियुक्ति 12 अक्टूबर 2006 को श्री गांधी स्मारक इंटर कालेज हाटा कुशीनगर में हुई* *उसके पश्चात रूचि मल के साथ विवाह बंधन में बंध गए पत्नी ने दो जुड़वा पुत्रों श्रेयांश व दिव्य को जन्म दिया परिवार खुशियों से भर उठा|
इसी बीच 2016 में वे अटेवा से जुड़े और अटेवा के समर्पित सिपाही बन गए उनका कहना था कि* *संघर्ष के द्वारा दुर्गम रास्ते को भी सुगम बनाया जा सकता है*
अटेवा के प्रत्येक संघर्ष के वे साक्षी रहे ,हंसता खेलता परिवार बच्चे सब कुछ सही चल रहा था किंतु विधाता को शायद यह मंजूर नहीं था |
6 दिसंबर को पत्नी व बच्चों को आश्वस्त करके घर से निकले थे कि इस बार लखनऊ से पुरानी पेंशन का शासनादेश लेकर ही आऊंगा किन्तु 07 दिसंबर 2017 को ईश्वर ने कुछ और ही तय कर रखा था ,लखनऊ में अटेवा के महारथियों पर हृदयहीन पुलिस ने बिना किसी सूचना के लाठी चार्ज कर दिया और रामाशीष इस बर्बरता के शिकार हो गए|
कुशीनगर में इंतजार कर रहे पत्नी व बच्चों तथा महाराजगंज में इंतजार कर रहे बूढ़े मां बाप के पास उनकी लाश पहुंची |
*वह मंजर कैसे भूला जा सकता है जब हर आंख में आंसुओं का सैलाब था तथा चारों ओर एक ही नारा था
◆ शिक्षक हत्या- राष्ट हत्या:
यह विडंबना ही है कि 7 जनवरी 1977 को जन्मे बालक ने 7 दिसंबर 2016को अंतिम सांस ली*
आज राम आशीष हमारे बीच नहीं हैं किंतु उन का सपना उनका त्याग उनका बलिदान हमारे साथ है और जब तक पुरानी पेंशन बहाल नहीं हो जाती ना तो ये कलम रुकेगी और ना ही हमारे कदम रुकेंगे
अंत में
हम तुम्हें यूं भुला न पाएंगे
जब भी आएगी बात पेंशन की
तेरे बलिदान याद आएंगे
डा०रामाशीष जी को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि
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साभार
श्रवण कुमार कुशवाहा
सहयोग- राजीव यादव
आपका पेंशन विहीन साथी
डॉ०आशीष कुमार वर्मा
मण्डल अध्यक्ष(लखनऊ मण्डल)
अटेवा पेंशन बचाओ मंच(उ.प्र.)
Mo-9839592707