कानपुर : कभी चबूतरे पर बैठ की पढ़ाई, अब NDA ने बनाया इन्हें राष्ट्रपति का उम्मीदवार,बिहार के राज्यपाल राम नाथ कोविंद को NDA ने बनाया राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार,

कानपुर ।  राष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए ने राम नाथ कोविंद का नाम अपने उम्मीदवार के रूप में तय किया है। सोमवार को बीजेपी की संसदीय दल की बैठक में यह फैसला लिया गया।

वर्तमान में बिहार के राज्यपाल राम नाथ कोविंद यूपी के कानपुर के रहने वाले हैं। DainikBhaskar.com आपको इनकी पर्सनल लाइफ और कुछ किस्सों के बारे में बातने जा रहा है।

रामनाथ कोविंद का जन्म 1 अक्टूबर 1945 को कानपुर देहात के एक छोटे से गांव परौख के झींझक कस्बे में हुआ। शुरुआती पढ़ाई संदलपुर ब्लॉक के गांव खानपुर से हुई। आज वहां एक प्राइमरी स्कूल बन गया है।

◆ इनके बचपन के दोस्त वीरेंद्र सिंह ने बताया, 'रामनाथ सहित 5 दोस्त हमेशा साथ रहते थे। हम सभी में कोविंद पढ़ाई में सबसे तेज थे। जब हम खेलते थे, तो भी वे घर के बाहर बने चबूतरे पर बैठ पढ़ाई किया करते थे।'

◆  उस समय गांव में स्कूल न के बराबर होते थे। इस वजह से गांव के ज्यादातर बच्चे 5वीं तक पढ़ने के बाद पिता के काम-धंधों में हाथ बंटाने लगते थे।

◆ रामनाथ कोविंद के पिता मैकूलाल गांव में ही स्थापित एक प्राचीन मंदिर के पुजारी थे। पूजा-पाठ से कम ही आय होती थी और किसी तरह से परिवार का भरण-पोषण होता था।

रामनाथ 5 भाइयों में सबसे छोटे हैं। इतनी कमाई में बेटों को पढ़ाना, उनके पिता के सामने सबसे बड़ी समस्या थी। फिर भी उनके पिता को पूरा भरोसा था। उन्होंने बच्चों को समाज के हित में काम करने की सीख दी।

◆ 8 किमी दूर जाते थे पढ़ने :-
वीरेंद्र सिंह ने बताया कि रामनाथ कोविंद पढ़ने के लिए गांव से करीब 8 किमी दूर प्रयागपुर दिलवल जाते थे। यहीं से इन्होंने 8वीं तक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद कानपुर के बीएनएसडी शिक्षा निकेतन से उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई की।

फिर डीएवी लॉ कॉलेज से ग्रैजुएशन किया। इस दौरान वे कई बार गांव में अपने घर आए। हालांकि, माता-पिता का देहांत होने के बाद उन्होंने गांव छोड़ दिया। वहीं, अब उनके चारों भाई भी दूसरी जगहों पर रहने लगे हैं।

घाटमपुर लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में रखा कदम
कानपुर से ग्रैजुएशन करने के बाद रामनाथ कोविंद ने दिल्ली हाईकोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस शुरू कर दी। इस दौरान वो सुप्रीम कोर्ट के जूनियर काउंसलर के पद पर रहे।

साल 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद वे तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरार जी देसाई के निजी सचिव बने। इसके बाद बीजेपी के संपर्क में आए कोविंद को पार्टी ने साल 1990 में घाटमपुर लोकसभा सीट से चुनाव के मैदान में उतारा।

हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद साल 2007 में उन्हें भोगनीपुर सीट से चुनाव लड़ाया गया, लेकिन इस बार भी उनकी किस्मत ने धोखा दिया और वे हार गए।

1994 से 2000 तक यूपी से रहे राज्यसभा के सदस्य
साल 1994 से 2000 तक राम नाथ कोविंद यूपी से राज्‍यसभा के सदस्‍य रहे। अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रवक्ता भी रहे। वे लगातार क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं से संपर्क में रहे।

साथ ही राज्यसभा के सदस्य के रूप में भी उन्होंने विकास कार्यों में योगदान दिया।

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