नई दिल्ली, जेएनएन। देश की आन-बान-शान तिरंगा अभी कुछ ही दिन पहले अटारी बॉर्डर पर लगाया गया था। लेकिन, सबसे ऊंचे तिरंगे को अब थोड़ा छोटा करना होगा।
जी हां, और इसकी वजह कोई दुश्मन या पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान नहीं। बल्कि इसकी वजह वो हवा है जो अपनी पूरी ताकत से इस तिरंगे को नुकसान पहुंचा रही है। तेज हवाओँ के कारण देश का झंडा कई बार फट चुका है। जिसके बाद अधिकारियों ने इसे छोटा करने का फैसला किया है।

ये तिरंगा 120 फीट लंबा और 80 फीट चौड़ा है। झंडे के पोल का वजन 55 टन है और इसके निर्माण पर 3.5 करोड़ रुपए का खर्च आया है। कहा जाता है कि भारत-पाक सीमा पर 355 फीट की ऊंचाई पर लगा ये झंडा लाहौर से भी दिखाई देता है। अमृतसर सुधार ट्रस्ट इस झंडे को 72 फीट से 48 फीट करना चाहती है। छोटे झंडे का वजन कम होगा और इसकी कीमत भी कम होगी।
पहले जो झंडा लगा हुआ था उसका वजन 100 किलो से ज्यादा था और उसकी कीमत एक लाख रुपये से ज्यादा थी। फ्लैग कोड ऑफ इंडिया के अनुसार झंडे की लंबाई और ऊंचाई 3:2 का रखना है।
इस ध्वज को स्थापित किए एक महीने से भी कम वक्त हुआ है। 1.25 लाख के इस झंडे को तीन बार बदला जा चुका है। तेज हवा के कारण यह झंडा बार- बार फट जाता है। खबरों के मुताबिक जब यह राष्ट्रीय ध्वज चौथी बार फटा था, तब रफू कर उसे दोबारा फहरा दिया गया.
यह तिरंगा बीते 5 मार्च को तत्कालीन निकाय मंत्री अनिल जोशी ने फहराया था।
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