नई दिल्ली (जेएनएन)। पाक आतंकी ग्रुप द्वारा 26/11 हमले का दोहराया जाना भारत बर्दाश्त नहीं करेगा। ब्रूसेल्स आधारित थिंक टैंक ‘इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप’ ने हाल में रिलीज किए गए अपने रिपोर्ट में इस बात का
उल्लेख किया है।

उनकी यह रिपोर्ट साउथ एशिया में आतंकवाद संबंधित
अमेरिकी पॉलिसी के विश्लेषण पर आधारित है।
बता दें कि सितंबर में उड़ी हमले के जवाब में भारतीय जवानों ने एलओसी पर सर्जिकल स्ट्राइक किया और कई आतंकियों व उनके ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, भारत विरोधी दो आतंकी गुटों- लश्कर-ए- तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद को पाकिस्तान में संरक्षण प्राप्त है और इनसे अमेरिका को भी खतरा है। हालांकि अल कायदा से इनका कोई संबंध नहीं
है उनके लड़ाके अफगानिस्तान और पाकिस्तान में वैश्विक जिहादियों और अन्य आतंकियों से जुड़ें हैं।
कश्मीर में भारतीय सुरक्षाबलों पर आतंकी हमले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया काफी सोच-समझी हुई थी। लेकिन उनकी प्रतिक्रिया से यह संकेत मिला कि 2008 में हुए मुंबई हमले की तरह का एक
और हमला होने पर उनके लिए संयम बरतना कठिन होगा।
'Counterterrorism Pitfalls: What the US Fight against ISIS and al-Qaeda
Should Avoid' नामक शीर्षक वाले इस रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका के लिए मुख्य चुनौती है तालिबान को बातचीत के लिए मनाना है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका को आतंकवाद का सामना करने के लिए चीन की मदद की जरूरत होगी। चीन के जरिए वह पाकिस्तान को आंतकवाद के खिलाफ मना सकता है।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि पाकिस्तानी की जिहादी समस्या उसकी खुद की बनाई हुई है और यह गहराई तक जड़ें जमा चुकी है। इस बारे में कहा गया है, ‘अफगान तालिबान के जिस नेता ने बिना पाकिस्तान की अनुमति के अमेरिका या अफगान सरकार से बात की उसे या तो जेल में डाल दिया गया या फिर गायब कर दिया गया है। भारत से रिश्तों पर रणनीतिक पुनर्विचार से ही लश्कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्मद को ध्वस्त किया जा सकता है।‘
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